Thursday, February 9, 2023
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वैज्ञानिकों ने बनाया सुपरबग्स को मारने वाला एंटीबायोटिक, 70 लाख लोगों की बचेगी जान


Antibiotic to Kill Superbugs : विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, सुपरबग्स का एंटीबायोटिक प्रतिरोध (antibiotic resistance) बढ़ता जा रहा है और ये वैश्विक स्वास्थ्य (global health) से जुड़े 10 बड़े खतरों में शुमार है. लेकिन, अब नई एंटीबायोटिक दवा की खोज से हर साल सुपरबग्स (Super bugs) के कारण लगभग जान गंवाने वाले 70 लाख लोगों को बचाया जा सकेगा. आपको बता दें कि सुपरबग्स वे बैक्टीरिया होते हैं, जिन पर एंटीबायोटिक के ज्यादा या गलत तरीके से लेने की वजह से असर होना बंद हो जाता है. साधारण भाषा में कहें तो एंटीबायोटिक्स का प्रतिरोध करने वाले बैक्टीरिया को सुपरबग्स (Super bugs) भी कहा जाता है. दैनिक भास्कर अखबार में छपी न्यूज रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिटेन के साइंटिस्टों ने अब एक रिसर्च में सुपरबग्स को मारने वाला एंटीबायोटिक (Antibiotic) खोज लिया है.

यूनिवर्सिटी ऑफ लिवरपूल (University of Liverpool) की रिसर्च में सामने आया है कि इस ड्रग्स (दवा) ने चूहों में किसी भी हेल्दी टिशू को नुकसान पहुंचाए बिना सुपरबग्स को खत्म कर दिया.

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क्यों बनाया गया इस एंटीबायोटिक का सिंथेटिक रूप
कई दशकों में खोजा गए पहले एंटीबायोटिक टिक्सोबेक्टिन (Teixobactin) का ये सिंथेटिक रूप है. बता दें कि साल 2015 में अमेरिका के मेन राज्य में इस ड्रग्स के बारे में पता चला था. तब आम जनता को इसके बारे में नहीं बताया गया, क्योंकि इसका प्रोडक्शन बहुत महंगा था. अब साइंटिस्टों ने 2000 गुना कम लागत में इसका सिंथेटिक रूप (synthetic form) बनाने में सफलता पा ली है. अब बड़ी मात्रा में टिक्सोबेक्टिन बनाई जा सकेगी.

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कोविड के दौरान लोगों को कई तरह के एंटीबायोटिक्स दिए गए, जिनका वायरस पर कोई असर नहीं होता है. इसके चलते सुपरबग्स से जान गंवाने वाले लोगों की संख्या बढ़ी है. इंग्लैंड सरकार के एक कमीशन ने अनुमान लगाया है कि 2050 तक सुपरबग्स के कारण हर साल और 1 करोड़ लोगों की जान जा सकती है.

रूम टेंपरेचर पर रखी जा सकती है दवा
टिक्सोबेक्टिन चूहों में MRSA नाम के सुपरबग को मारने में सफल रहा, जिस पर अब तक कई सारी एंटीबायोटिक बेअसर साबित हुई हैं. यह इंसानों में पाए जाने वाले कई बैक्टीरिया को मारने में भी सफल रहा है. इसे सुपरबग्स के खिलाफ आखिरी बचाव के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा. टिक्सोबेक्टिन (Teixobactin) को कमरे के नॉर्मल टेंपरेचर में रखा जा सकता है. इसके चलते इसे आसानी से दुनिया भर में भेजा जा सकेगा.

Tags: Health, Health News, Lifestyle



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