Sunday, October 2, 2022
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एम्नेसिया की परेशानी होगी कम, साइंटिस्टों ने लॉन्ग टर्म मेमोरी के लिए विकसित किया तंत्र


Identify mechanism for long term memory storage : रिसर्चर्स जब ये पता लगाने की कोशिश कर रहे थे कि ब्रेन में यादों का किस प्रकार संग्रह (Stored) होता है, तब उन्होंने एक नए प्रोटीन फोल्डिंग तंत्र (protein folding mechanism) की पहचान की, जो दीर्घकालिक स्मरण शक्ति (long-term memory storage) के लिए अत्यावश्यक है. रिसर्चर्स ने बताया कि ये तंत्र (mechanism) अल्जाइमर डिजीज के टाऊ आधारित माउस मॉडल में खराब अवस्था में होता है. अगर इस प्रोटीन फोल्डिंग तंत्र को बहाल कर दिया जाए, तो डिमेंशिया के कारण होने वाली एम्नेसिया (amnesia) यानी स्मृतिलोप की परेशानी काफी हद तक दूर की जा सकती है. फोल्डिंग तकनीक के जरिए प्रोटीन की 3डी शृंखला तैयार कर उसे जैविक रूप से सक्रिय किया जाता है. इस स्टडी का निष्कर्ष ‘साइंस एडवांसेज’ नामक मेडिकल जर्नल में प्रकाशित किया गया है.

रिसर्चर्स की टीम को लीड करने वाले न्यूरो साइंटिस्ट टेड एबल (Ted Abel) की प्रयोगशाला में सहयोगी और अमेरिका स्थित आयोवा न्यूरोसाइंस इंस्टीट्यूट (Iowa Neuroscience Institute) के निदेशक स्नेहज्योति चटर्जी (Snehajyoti Chatterjee) ने किया. टीम ने माउस मॉडल में चैपरोन प्रोटीन को फिर से सक्रिय करने के लिए जीन थेरेपी का भी इस्तेमाल किया और पाया कि याददाश्त की कमी को उलट दिया गया था, यह पुष्टि करते हुए कि प्रोटीन फोल्डिंग मशीनरी मेमोरी के लिए मॉलीक्यूलर स्विच (molecular switch) के रूप में कार्य करती है.

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क्या कहते हैं जानकार
चटर्जी के अनुसार, ‘दीर्घकालिक स्मरण शक्ति (long term memory power) में प्रोटीन फोल्डिंग मशीनरी की भूमिका को दशकों तक नजरअंदाज किया गया है. हम जानते है कि दीर्घकालिक स्मृतियों को एकत्र करने के लिए जीन एक्सप्रेशन व प्रोटीन संश्लेषण आवश्यक है. प्रोटीन को कार्यात्मक रूप से एक्टिव बनाने के लिए उन्हें सही ढंग से फोल्ड करने की आवश्यकता होता ही. हमारा काम इस अवधारणा को प्रदर्शित करता है कि ये चैपरोन प्रोटीन वे हैं, जो वास्तव में सिनैप्टिक फंक्शन व प्लास्टिसिटी को प्रभावित करने के लिए प्रोटीन को फोल्ड करते या मोड़ते हैं.’

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टेल एबल (Ted Abel) का कहना है, “इस प्रोटीन फोल्डिंग तंत्र की पहचान करना ये समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है कि यादें कैसे संग्रहीत की जाती हैं और स्मृति हानि (मेमोरी लॉस) से जुड़े रोगों में क्या गलत होता है, भले ही हम इससे अभी किसी मरीज की देखभाल करने के प्वाइंट पर नहीं हैं, लेकिन इस पाथवे को समझना एक दिन न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारी को रोकने और उसका इलाज करने में सक्षम होने के लिए आवश्यक है.”

Tags: Health, Health News, Lifestyle



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